Tuesday, August 26, 2008

वजूद..नाना पाटेकर


कैसे बताऊ मै तुम्हे..
तुम मेरे लिए कौन हो
कैसे बताऊ
कैसे बताऊ तुम्हे तुम धडकनों का गीत हो
जीवन का तुम संगीत हो
तुम जिन्दगी तुम बंदगी
तुम रोशनी तुम ताजगी
तुम हर ख़ुशी तुम प्यार हो
तुम प्रीत हो मनमीत हो
आँखों में तुम यादो में तुम
सासों में तुम आहो में तुम
नींद में तुम ख्वाबो में तुम
तुम हो मेरी हर बात में
तुम हो मेरे दिमाग में
तुम सुबह में
तुम शाम में
तुम सोच में तुम काम में
मेरे लिए पाना भी तुम
मेरे लिए खोना भी तुम
मेरे लिए हसना भी तुम
मेरे लिए रोना भी तुम
और जागना सोना भी तुम
जाऊ कहिभी क्योंकी तुम हो वहा
तुम हो वहा
कैसे बताऊ तुम्हे के
तुम बिन तो मै कुछ भी नहीं
कैसे बताऊ तुम्हे
तुम मेरे लिए कौन हो
कैसे बताऊ...

ये जो तुम्हारा रूप है
ये जिन्दगी की धुप है
चन्दन से तराशा है बदन
बहती है जिसमे एक अगन
ये शोखिया ये मस्तिया..
तुमको हवाओ से मिली
जुल्फे घटाओ से मिली
होठो में कालिया खिल गयी
आँखों में चीनी मिल गयी
चेहरे में सिमटी चांदनी
आवाज में है रागिनी
शीशे के जैसा रूप है
फूलोके जैसा रंग है
नदियों के जैसी चाल है
क्या हुस्न है क्या हाल है
ये जिस्म की रंगिनिया जैसे
हजारो तितलिया
बाहों की ये गोलाईया
आँचल में है परछाईया
ये नगरिया है ख्वाब की
कैसे बताऊ तुम्हे हालत
दिल- इ- बेताब की
कैसे बताऊ मै तुम्हे
मेरे लिए तुम कौन हो
कैसे बताऊ..

कैसे बताऊ मै तुम्हे
मेरे लिए तुम धर्म हो
मेरे लिए तुम ईमान हो
तुम ही इबादत हो मेरी
तुम ही तो चाहत हो मेरी
तुम ही मेरा अरमान हो
ताकता हु मै हर पल जिसे
तुम ही तो वो तस्वीर हो
तुम ही तो मेरी तकदीर हो
तुम ही सितारा हो मेरा
तुम ही नज़ारा हो मेरा
यु ध्यान में मेरे हो तुम
जैसे मुझे घेरे हो तुम
पूरब में तुम
पश्चिम में तुम
उत्तर में तुम
दक्षिण में तुम
सारे मेरे जीवन में तुम ही तुम
हर पल में तुम
हर क्षण में तुम
मेरे लिए रास्ता भी तुम
मेरे लिए मंजिल भी तुम
मेरे लिए सागर भी तुम
मेरे लिए साहिल भी तुम
मै देखता बस तुमको हूँ
मै सोचता बस तुमको हूँ
मै जानता बस तुमको हूँ
मै मानता बस तुमको हूँ
तुम ही मेरी पहचान हो
कैसे बताऊ मै तुम्हे..
देवी हो तुम मेरे लिए
मेरे लिए भगवान् हो
कैसे बताऊ मै तुम्हे
मेरे लिए तुम कौन हो ...
कैसे बताऊ !

Tuesday, July 8, 2008

कुछ इस तरह ...


  • अपने बिस्तर पे बहुत देर से मै नीमदराज़ ,
  • ये सोचती हु के इस वक़्त वो कहा होगा
  • मै यहाँ हु मगर उस कूचा-ओ-रगों बू में
  • रोज़ की तरह वो आज भी आया होगा
  • और जब वहा मुझे न पाया होगा
  • ' आपको इल्म है की वो आज नही आई है?'
  • मेरी हर दोस्त से उसने यही पूछा होगा
  • क्या बात हुई आख़िर ,वो क्यों नही आयी
  • अपने आपमें सौ बार उलझा होगा
  • वो कल आएगी तो मै उससे बात नही करूँगा
  • अपने आपसे वो सौ बार रूठा होगा
  • हर लॉन में ,हर रहदारी में , हर फूल के करीब
  • हर तरफ़ जाकर उसने मुझे ढूँढा होगा
  • ' वो नही तो बुलंदी का सफर कितना कठिन'
  • सीढिया चढ़ते हुए भी उसने यही सोचा होगा
  • भूले से जो मेरा नाम कही आया होगा
  • गैर महसूस तरीके से वो चौका होगा
  • एकही जुमले को कई बार सुनाया होगा
  • और बात करते करते सौ बार वो भूला होगा
  • ' ये जो नयी लड़की आई कही ये वो तो नही?'
  • हर चेहरा उसने यही सोचकर देखा होगा
  • जाने महफिल है मगर आज फकत मेरे बगैर
  • हाय ,किस तरह वो महफ़िल में तनहा होगा
  • हुई होगी जो कभी सन्नाटे से वहशत उसको
  • हो सकता उसने मुझको ही पुकारा होगा
  • चलते चलते कोई मानुस सी आहट
  • अपने दोस्तोंको किसी उसने रोका होगा
  • याद करके मुझे नम हो गयी होगी पलके उसकी
  • 'आँख में पड़ गया कुछ ' कहके टाला होगा
  • और घबराकर जब ली होगी किताबों में पनाह
  • तो हर सतह पर मेरा चेहरा उभर आया होगा
  • और जब मिली होगी उसे मेरी अलालत की ख़बर
  • आहिस्ता से उसने दीवार को ही थामा होगा
  • बहल जाए किसी तरह परेशान दिल
  • रास्ते में किसीभी शख्स को उसने रोका होगा
  • इत्तेफाकन उसी शाम मुझे मेरी सहेली मिली
  • मैंने पूछा उससे ' सुनो, आया था वो?'
  • ' मुझे पूछा था ? मुझे ढूँढा था चारो जानिब ?'
  • तो उसने एक लम्हे को मुझे देखा....
  • और फिर जोर से हसदी...
  • उस हसी में वो तल्खी थी, वो उदासी थी ...
  • की याद नही बादमे क्या कहा उसने
  • पर इतना मालुम है
  • कुछ इस तरह ......
  • मेरे सारे ख्वाबों का भरम टूट गया ॥