Tuesday, July 8, 2008

कुछ इस तरह ...


  • अपने बिस्तर पे बहुत देर से मै नीमदराज़ ,
  • ये सोचती हु के इस वक़्त वो कहा होगा
  • मै यहाँ हु मगर उस कूचा-ओ-रगों बू में
  • रोज़ की तरह वो आज भी आया होगा
  • और जब वहा मुझे न पाया होगा
  • ' आपको इल्म है की वो आज नही आई है?'
  • मेरी हर दोस्त से उसने यही पूछा होगा
  • क्या बात हुई आख़िर ,वो क्यों नही आयी
  • अपने आपमें सौ बार उलझा होगा
  • वो कल आएगी तो मै उससे बात नही करूँगा
  • अपने आपसे वो सौ बार रूठा होगा
  • हर लॉन में ,हर रहदारी में , हर फूल के करीब
  • हर तरफ़ जाकर उसने मुझे ढूँढा होगा
  • ' वो नही तो बुलंदी का सफर कितना कठिन'
  • सीढिया चढ़ते हुए भी उसने यही सोचा होगा
  • भूले से जो मेरा नाम कही आया होगा
  • गैर महसूस तरीके से वो चौका होगा
  • एकही जुमले को कई बार सुनाया होगा
  • और बात करते करते सौ बार वो भूला होगा
  • ' ये जो नयी लड़की आई कही ये वो तो नही?'
  • हर चेहरा उसने यही सोचकर देखा होगा
  • जाने महफिल है मगर आज फकत मेरे बगैर
  • हाय ,किस तरह वो महफ़िल में तनहा होगा
  • हुई होगी जो कभी सन्नाटे से वहशत उसको
  • हो सकता उसने मुझको ही पुकारा होगा
  • चलते चलते कोई मानुस सी आहट
  • अपने दोस्तोंको किसी उसने रोका होगा
  • याद करके मुझे नम हो गयी होगी पलके उसकी
  • 'आँख में पड़ गया कुछ ' कहके टाला होगा
  • और घबराकर जब ली होगी किताबों में पनाह
  • तो हर सतह पर मेरा चेहरा उभर आया होगा
  • और जब मिली होगी उसे मेरी अलालत की ख़बर
  • आहिस्ता से उसने दीवार को ही थामा होगा
  • बहल जाए किसी तरह परेशान दिल
  • रास्ते में किसीभी शख्स को उसने रोका होगा
  • इत्तेफाकन उसी शाम मुझे मेरी सहेली मिली
  • मैंने पूछा उससे ' सुनो, आया था वो?'
  • ' मुझे पूछा था ? मुझे ढूँढा था चारो जानिब ?'
  • तो उसने एक लम्हे को मुझे देखा....
  • और फिर जोर से हसदी...
  • उस हसी में वो तल्खी थी, वो उदासी थी ...
  • की याद नही बादमे क्या कहा उसने
  • पर इतना मालुम है
  • कुछ इस तरह ......
  • मेरे सारे ख्वाबों का भरम टूट गया ॥








No comments: